Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.130.41-42: इस प्रकार यह सब तुम्हें समझाया गया है। तीनों शरीरों की गति भी बताई गई है। श्राद्ध में भोजन के लिए आमंत्रित ब्राह्मण उस दिन के लिए यजमान के पिता का पद प्राप्त करता है; इसलिए उस दिन उसके लिए मैथुन वर्जित माना गया है। हे देवराज! ब्राह्मण को चाहिए कि वह श्राद्ध में सदैव स्नान आदि से शुद्ध होकर ही भोजन करे॥ 41-42॥   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 41-42
 
 
श्लोक  13.130.41-42 
एतत् ते कथितं सर्वं त्रिषु पिण्डेषु या गति:।
ऋत्विग्यो यजमानस्य पितृत्वमनुगच्छति॥ ४१॥
तस्मिन्नहनि मन्यन्ते परिहार्यं हि मैथुनम्।
शुचिना तु सदा श्राद्धं भोक्तव्यं खेचरोत्तम॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार यह सब तुम्हें समझाया गया है। तीनों शरीरों की गति भी बताई गई है। श्राद्ध में भोजन के लिए आमंत्रित ब्राह्मण उस दिन के लिए यजमान के पिता का पद प्राप्त करता है; इसलिए उस दिन उसके लिए मैथुन वर्जित माना गया है। हे देवराज! ब्राह्मण को चाहिए कि वह श्राद्ध में सदैव स्नान आदि से शुद्ध होकर ही भोजन करे॥ 41-42॥
 
In this way all this has been explained to you. The movement of the three bodies has also been explained. The Brahmin invited for food in the Shraddha acquires the status of the father of the host for that day; therefore sexual intercourse is considered inadmissible for him on that day. O angel, the best among the celestial beings! A Brahmin should always eat food in the Shraddha after purifying himself by bathing etc.॥ 41-42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)