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mahabharat 13.130.35-36h: परन्तु पितृकार्य का रहस्य वे भी निश्चित रूप से नहीं जानते। महान एवं अमर महात्मा मार्कण्डेय के अतिरिक्त, जो पितृभक्त तथा वरदान प्राप्त एक अत्यंत यशस्वी ब्राह्मण हैं, इसे कोई नहीं जानता।   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 35-36h
 
 
श्लोक  13.130.35-36h 
तेऽप्येवं नाभिजानन्ति पितृकार्यविनिश्चयम्।
वर्जयित्वा महात्मानं चिरजीविनमुत्तमम्॥ ३५॥
पितृभक्तस्तु यो विप्रो वरलब्धो महायशा:।
 
 
अनुवाद
परन्तु पितृकार्य का रहस्य वे भी निश्चित रूप से नहीं जानते। महान एवं अमर महात्मा मार्कण्डेय के अतिरिक्त, जो पितृभक्त तथा वरदान प्राप्त एक अत्यंत यशस्वी ब्राह्मण हैं, इसे कोई नहीं जानता।
 
But even they do not know the secret of Pitrakarya for sure. No one knows it except the great and immortal Mahatma Markandeya, who is a devotee of his father and a highly renowned Brahmin who has received a boon. 35 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)