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mahabharat 13.130.33-34: पितरों ने कहा - हे देवदूत! आपने यह महान प्रश्न किया है और हमसे एक अद्भुत रहस्य पूछा है। देवता और ऋषिगण भी इस पितृ-कर्म की प्रशंसा करते हैं। 33-34.   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  13.130.33-34 
पितर ऊचु:
सुमहानेष प्रश्नो वै यस्त्वया समुदीरित:॥ ३३॥
रहस्यमद्भुतं चापि पृष्टा: स्म गगनेचर।
एतदेव प्रशंसन्ति देवाश्च मुनयस्तथा॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
पितरों ने कहा - हे देवदूत! आपने यह महान प्रश्न किया है और हमसे एक अद्भुत रहस्य पूछा है। देवता और ऋषिगण भी इस पितृ-कर्म की प्रशंसा करते हैं। 33-34.
 
The ancestors said - O heavenly angel! You have raised this great question and asked us about a wonderful mystery. Even the gods and sages praise this ancestral deed. 33-34.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)