Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 13.130.29-30h: परन्तु यदि शरीर को पहले उठाकर जल में डुबोया जाए, जैसा कि कहा गया है, तो उसे कौन ग्रहण करता है? कौन-सा देवता तृप्त होता है? और इससे पितरों को किस प्रकार मुक्ति मिलती है?॥29 1/2॥   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 29-30h
 
 
श्लोक  13.130.29-30h 
एक: समुद्‍धृत: पिण्डो ह्यधस्तात् कस्य गच्छति॥ २९॥
कं वा प्रीणयते देवं कथं तारयते पितॄन्।
 
 
अनुवाद
परन्तु यदि शरीर को पहले उठाकर जल में डुबोया जाए, जैसा कि कहा गया है, तो उसे कौन ग्रहण करता है? कौन-सा देवता तृप्त होता है? और इससे पितरों को किस प्रकार मुक्ति मिलती है?॥29 1/2॥
 
But if the body is first lifted and then immersed in water as has been said, then who receives it? Which god is satisfied? And how does it liberate the ancestors?॥ 29 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)