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mahabharat 13.130.28-29h: देवदूत ने पूछा - हे पितरों! आपने एक-एक करके पिंडों का विभाजन बताया है तथा तीनों लोकों में सभी पितरों को पिंडदान करने की शास्त्रों में बताई गई विधि भी बताई है।   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 28-29h
 
 
श्लोक  13.130.28-29h 
देवदूत उवाच
आनुपूर्व्येण पिण्डानां प्रविभाग: पृथक् पृथक्॥ २८॥
पितॄणां त्रिषु सर्वेषां निरुक्तं कथितं त्वया।
 
 
अनुवाद
देवदूत ने पूछा - हे पितरों! आपने एक-एक करके पिंडों का विभाजन बताया है तथा तीनों लोकों में सभी पितरों को पिंडदान करने की शास्त्रों में बताई गई विधि भी बताई है।
 
The angel asked - O ancestors! You have explained the division of pindas one by one and have also told the method prescribed in the scriptures for offering pindas to all the ancestors in the three worlds. 28 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)