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mahabharat 13.130.24: जो मनुष्य श्राद्ध में भोजन और दान देने के बाद स्त्री के साथ समागम करता है, उसके पितर एक महीने तक उसी वीर्य में सोते हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.130.24 
श्राद्धं दत्त्वा च भुक्त्वा च पुरुषो य: स्त्रियं व्रजेत्।
पितरस्तस्य तं मासं तस्मिन् रेतसि शेरते॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य श्राद्ध में भोजन और दान देने के बाद स्त्री के साथ समागम करता है, उसके पितर एक महीने तक उसी वीर्य में सोते हैं।
 
The man who after giving food and charity in the Shraddha ceremony has intercourse with a woman, his ancestors sleep in the same semen for a month. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)