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mahabharat 13.130.2: हे गंगापुत्र! कृपा करके सब दानों में श्रेष्ठ दान, किस प्रकार दान करने योग्य उत्तम वस्तुएँ, तथा कौन-सी वस्तुएँ पूजनीय एवं पूजनीय हैं - ये सब गूढ़ (गोपनीय) विषय कहिए॥ 2॥   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  13.130.2 
दानानामुत्तमं यच्च देयं यच्च यथा यथा।
मान्यान् पूज्यांश्च गाङ्गेय रहस्यं वक्तुमर्हसि॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे गंगापुत्र! कृपा करके सब दानों में श्रेष्ठ दान, किस प्रकार दान करने योग्य उत्तम वस्तुएँ, तथा कौन-सी वस्तुएँ पूजनीय एवं पूजनीय हैं - ये सब गूढ़ (गोपनीय) विषय कहिए॥ 2॥
 
O son of Ganga! Please describe the best of all donations, the things that are best to be donated in what manner, and those that are honourable and worthy of worship - all these mysterious (confidential) topics.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)