Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.130.17: शुद्ध मन वाला मनुष्य भक्तिपूर्वक शास्त्रों का श्रवण करने से पूर्व ही पापों से मुक्त हो जाता है और भविष्य में भी पापों में लिप्त नहीं होता। वह प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान करता है और मृत्यु के पश्चात उत्तम लोक को प्राप्त होता है॥17॥ | mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मुच्यते किल्बिषाच्चैव न स पापेन लिप्यते।
धर्मं च लभते नित्यं प्रेत्य लोकगतो नर:॥ १७॥
अनुवाद
शुद्ध मन वाला मनुष्य भक्तिपूर्वक शास्त्रों का श्रवण करने से पूर्व ही पापों से मुक्त हो जाता है और भविष्य में भी पापों में लिप्त नहीं होता। वह प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान करता है और मृत्यु के पश्चात उत्तम लोक को प्राप्त होता है॥17॥
A man with a pure mind becomes free from sins before listening to the scriptures with devotion and he does not get involved in sins in the future also. He performs religious rituals daily and after death he attains the best world.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥