Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.130.14: जो मनुष्य इस शास्त्र का नियमित पाठ करते हैं, इसके मर्म को समझते हैं और इसका अर्थ सुनकर दूसरों को समझाते हैं, वे स्वयं भगवान नारायण के स्वरूप हो जाते हैं ॥14॥ | mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये पठन्ति सदा मर्त्या येषां चैवोपतिष्ठति।
श्रुत्वा च फलमाचष्टे स्वयं नारायण: प्रभु:॥ १४॥
अनुवाद
जो मनुष्य इस शास्त्र का नियमित पाठ करते हैं, इसके मर्म को समझते हैं और इसका अर्थ सुनकर दूसरों को समझाते हैं, वे स्वयं भगवान नारायण के स्वरूप हो जाते हैं ॥14॥
Those men who regularly read this scripture, who understand its essence and who after listening to its meaning explain it to others, they become the embodiment of Lord Narayana himself. ॥14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥