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mahabharat 13.130.12-13: जिसमें पितरों के श्राद्ध के विषय में गहन बातें कही गई हैं, जहाँ सम्पूर्ण देवताओं का रहस्य पूर्णतः वर्णित है और जिसमें रहस्यों सहित महान फलदायी ऋषि-धर्म तथा बड़े-बड़े यज्ञों और समस्त दानों का फल प्रतिपादित किया गया है ॥12-13॥   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 12-13
 
 
श्लोक  13.130.12-13 
पितॄणां यत्र गुह्यानि प्रोच्यन्ते श्राद्धकर्मणि।
देवतानां च सर्वेषां रहस्यं कथ्यतेऽखिलम्॥ १२॥
ऋषिधर्म: स्मृतो यत्र सरहस्यो महाफल:।
महायज्ञफलं चैव सर्वदानफलं तथा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जिसमें पितरों के श्राद्ध के विषय में गहन बातें कही गई हैं, जहाँ सम्पूर्ण देवताओं का रहस्य पूर्णतः वर्णित है और जिसमें रहस्यों सहित महान फलदायी ऋषि-धर्म तथा बड़े-बड़े यज्ञों और समस्त दानों का फल प्रतिपादित किया गया है ॥12-13॥
 
In which profound things have been told about the Shraddh of ancestors, where the mystery of all the gods is fully described and in which the great fruitful Rishi-dharma along with its mysteries and the fruits of big yagyas and all donations have been propounded. ॥ 12-13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)