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mahabharat 13.130.11: इसमें धर्म और उसके रहस्यों का वर्णन है। यह परम पवित्र है, महान रहस्यमय तत्त्वों का श्रवण कराने वाला है, धार्मिक है और साक्षात् देवताओं द्वारा रचित है। इसका श्रवण करना चाहिए। 11॥   |   mahabharat अध्याय 13.130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 130: श्राद्धके विषयमें देवदूत और पितरोंका, पापोंसे छूटनेके विषयमें महर्षि विद्युत्प्रभ और इन्द्रका, धर्मके विषयमें इन्द्र और बृहस्पतिका तथा वृषोत्सर्ग आदिके विषयमें देवताओं, ऋषियों और पितरोंका संवाद  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.130.11 
धर्मव्याकरणं पुण्यं रहस्यश्रवणं महत्।
श्रोतव्यं धर्मसंयुक्तं विहितं त्रिदशै: स्वयम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
इसमें धर्म और उसके रहस्यों का वर्णन है। यह परम पवित्र है, महान रहस्यमय तत्त्वों का श्रवण कराने वाला है, धार्मिक है और साक्षात् देवताओं द्वारा रचित है। इसका श्रवण करना चाहिए। 11॥
 
It contains the explanation of religion and its secrets. It is the most sacred, the one who makes one listen to the great mysterious elements, is religious and is created by the gods in person. One should listen to it. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)