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mahabharat 13.129.d8: सृष्टि के समय सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड नारायण से उत्पन्न होता है और प्रलय के समय पुनः उन्हीं में विलीन हो जाता है।   |   mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक d8
 
 
श्लोक  13.129.d8 
नारायणाज्जगत‍् सर्वं सर्गकाले प्रजायते।
तस्मिन्नेव पुनस्तच्च प्रलये सम्प्रलीयते॥
 
 
अनुवाद
सृष्टि के समय सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड नारायण से उत्पन्न होता है और प्रलय के समय पुनः उन्हीं में विलीन हो जाता है।
 
At the time of creation, the entire universe emerges from Narayana and at the time of destruction, it dissolves back into him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)