श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक d7
 
 
श्लोक  13.129.d7 
नराज्जातानि तत्त्वानि नाराणीति ततो विदु:।
तान्येव चायनं तस्य तेन नारायण: स्मृत:॥
 
 
अनुवाद
सभी तत्व पुरुष से ही प्रकट हुए हैं, इसलिए उसे नर कहा जाता है। नर में ईश्वर का निवास है, इसलिए उसे नारायण कहा जाता है।
 
All the elements have manifested from man, therefore he is called Nar. Nar is the abode of God, therefore he is called Narayan.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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