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mahabharat 13.129.d27: अथवा यह भी माना जा सकता है कि अतीत में आपने किसी ब्राह्मण या गाय की हत्या की होगी, या किसी ब्राह्मण या देवता से बहुत सारा धन चुराया होगा, और इसी कारण आप दुबले-पतले और पीले होते जा रहे हैं।   |   mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक d27
 
 
श्लोक  13.129.d27 
ब्राह्मणो वा हतो गौर्वा ब्रह्मस्वं वा हृतं पुरा।
देवस्वं वाधिकं काले तेनासि हरिण: कृश:॥
 
 
अनुवाद
अथवा यह भी माना जा सकता है कि अतीत में आपने किसी ब्राह्मण या गाय की हत्या की होगी, या किसी ब्राह्मण या देवता से बहुत सारा धन चुराया होगा, और इसी कारण आप दुबले-पतले और पीले होते जा रहे हैं।
 
Or it can also be assumed that in the past you might have killed a Brahmin or a cow, or stolen a lot of wealth from a Brahmin or a deity, and that is why you are becoming thin and pale.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)