Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.129.d25: अथवा यह भी संभव है कि आपका पुत्र दुष्ट और उद्दण्ड हो, अथवा आपका दामाद घर की सारी सम्पत्ति चुराने वाला हो, अथवा आपकी पत्नी का स्वभाव अरुचिकर हो; इस कारण आप दुबले-पतले और पीले होते जा रहे हों। | mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(सुदुर्विनीत: पुत्रो वा जामाता वा प्रमार्जक:।
दारा वा प्रतिकूलास्ते तेनासि हरिण: कृश:॥
अनुवाद
अथवा यह भी संभव है कि आपका पुत्र दुष्ट और उद्दण्ड हो, अथवा आपका दामाद घर की सारी सम्पत्ति चुराने वाला हो, अथवा आपकी पत्नी का स्वभाव अरुचिकर हो; इस कारण आप दुबले-पतले और पीले होते जा रहे हों।
Or it is also possible that your son is ill-mannered and unruly, or your son-in-law is the one who steals away all the wealth of the house, or your wife has an unfriendly nature; because of this you are becoming thin and pale.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥