श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक d2
 
 
श्लोक  13.129.d2 
भीष्म उवाच
श्रूयतामिदमत्यन्तं गूढं संसारमोचनम्।
श्रोतव्यं च त्वया सम्यग् ज्ञातव्यं च विशाम्पते॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी बोले - प्रजानाथ! उस परम ऐश्वर्य का वर्णन सुनो, जो अत्यन्त रहस्यमय है, संसार के बन्धन से छुड़ाने वाला है तथा तुम्हारे द्वारा भली-भाँति सुनने और जानने योग्य है।
 
Bhishmaji said – Prajanath! Listen to the description of that supreme glory, which is very mysterious, liberating from the bondage of the world and capable of being heard and known well by you.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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