Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.129.d19-d20: भीष्मजी कहते हैं - राजन! नारदजी के ऐसा उपदेश देने पर विप्रवर पुण्डरीक भगवान श्रीहरिकी की आराधना करने लगे। स्वप्न में भी वे शंख-चक्र गदा से सुशोभित, मुकुट और कुण्डलों से विभूषित, सुन्दर श्रीवत्स चिन्ह और कौस्तुभमणि धारण किये हुए कमल-नेत्र नारायण देव को देखा करते थे और उस देवता को देखते ही बड़े वेग से उठकर उनके चरणों में प्रणाम किया करते थे। | mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भीष्मजी कहते हैं - राजन! नारदजी के ऐसा उपदेश देने पर विप्रवर पुण्डरीक भगवान श्रीहरिकी की आराधना करने लगे। स्वप्न में भी वे शंख-चक्र गदा से सुशोभित, मुकुट और कुण्डलों से विभूषित, सुन्दर श्रीवत्स चिन्ह और कौस्तुभमणि धारण किये हुए कमल-नेत्र नारायण देव को देखा करते थे और उस देवता को देखते ही बड़े वेग से उठकर उनके चरणों में प्रणाम किया करते थे।
Bhishmaji says – King! After Naradji gave such advice, Vipravar Pundarika started worshiping Lord Srihariki. Even in his dreams, he used to see the lotus-eyed Narayan Dev, who was adorned with a conch-chakra mace, decorated with a crown and earrings, wearing a beautiful Srivatsa symbol and Kaustubhamani, and on seeing that deity, he would get up with great speed and prostrate himself at his feet.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥