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mahabharat 13.129.d17: चाहे वह ब्रह्मचारी हो या गृहस्थ, वानप्रस्थ हो या सन्यासी, कोई भी भगवान विष्णु की पूजा छोड़ कर परम मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता।   |   mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक d17
 
 
श्लोक  13.129.d17 
ब्रह्मचारी गृहस्थो वा वानप्रस्थोऽथ भिक्षुक:।
केशवाराधनं हित्वा नैव यान्ति परां गतिम्॥
 
 
अनुवाद
चाहे वह ब्रह्मचारी हो या गृहस्थ, वानप्रस्थ हो या सन्यासी, कोई भी भगवान विष्णु की पूजा छोड़ कर परम मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता।
 
Be it a celibate or a householder, a Vanaprastha or a Sanyasi, none can attain the ultimate salvation if they give up the worship of Lord Vishnu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)