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mahabharat 13.129.d15: जो मनुष्य अपना कल्याण चाहता है, उसे श्रवण, ध्यान, कीर्तन, स्तुति और पूजन आदि के द्वारा ब्रह्मस्वरूप नारायण की सदैव पूजा करनी चाहिए।   |   mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक d15
 
 
श्लोक  13.129.d15 
श्रवणान्मननाच्चैव गीतिस्तुत्यर्चनादिभि:।
आराध्यं सर्वदा ब्रह्म पुरुषेण हितैषिणा॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य अपना कल्याण चाहता है, उसे श्रवण, ध्यान, कीर्तन, स्तुति और पूजन आदि के द्वारा ब्रह्मस्वरूप नारायण की सदैव पूजा करनी चाहिए।
 
The person who wants his own welfare should always worship Narayana in the form of Brahma through listening, meditation, singing, praising and worshiping etc.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)