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mahabharat 13.129.d14: जो मनुष्य इस अष्टाक्षर मंत्र ‘ॐ नमो नारायणाय’ को सनातन ब्रह्म के रूप में जानता है और अंत समय में इसका जप करता है, वह भगवान विष्णु के परम पद को प्राप्त करता है।   |   mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  13.129.d14 
नमो नारायणायेति यो वेद ब्रह्म शाश्वतम्।
अन्तकाले जपन्नेति तद्विष्णो: परमं पदम्॥
 
 
अनुवाद
जो मनुष्य इस अष्टाक्षर मंत्र ‘ॐ नमो नारायणाय’ को सनातन ब्रह्म के रूप में जानता है और अंत समय में इसका जप करता है, वह भगवान विष्णु के परम पद को प्राप्त करता है।
 
One who knows this Ashtakshar mantra ‘Om Namo Narayanay’ as eternal Brahma and chants it in the last days, attains the supreme status of Lord Vishnu.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)