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mahabharat 13.129.d12: अतः तुम शास्त्रों के समस्त गहन विवरणों को त्यागकर, एकचित्त होकर सर्वव्यापी अजन्मा भगवान नारायण का ध्यान करो।   |   mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक d12
 
 
श्लोक  13.129.d12 
तस्मात्त्वं गहनान् सर्वांस्त्यक्त्वा शास्त्रार्थविस्तरान्।
अनन्यचेता ध्यायस्व नारायणमजं विभुम्॥
 
 
अनुवाद
अतः तुम शास्त्रों के समस्त गहन विवरणों को त्यागकर, एकचित्त होकर सर्वव्यापी अजन्मा भगवान नारायण का ध्यान करो।
 
Therefore, abandoning all the in-depth details of the scriptures, you should meditate on the omnipresent unborn Lord Narayana with single-mindedness.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)