श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.129.8 
मुहूर्तमथ संचिन्त्य ब्राह्मणस्तस्य रक्षस:।
आभिर्गाथाभिरव्यग्र: प्रश्नं प्रतिजगाद ह॥ ८॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर ब्राह्मण ने कुछ देर सोचा और फिर शांतिपूर्वक निम्नलिखित श्लोकों (शब्दों) से राक्षस के प्रश्नों का उत्तर देना शुरू किया।
 
After listening to this the Brahmin thought for a while and then calmly began to answer the demon's questions with the following verses (words).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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