श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.129.4 
अत्राप्युदाहरन्तीममितिहासं पुरातनम्।
गृहीत्वा रक्षसा मुक्तो द्विजाति: कानने यथा॥ ४॥
 
 
अनुवाद
इस सम्बन्ध में प्राचीन इतिहास का एक उदाहरण दिया जाता है, जिसके अनुसार एक ब्राह्मण वन में राक्षस के चंगुल में फँस जाने पर भी कूटनीतिक युक्तियों से उससे मुक्त हो गया था ॥4॥
 
In this regard, an example of ancient history is given, according to which a Brahmin, even after being trapped in the clutches of a demon in a forest, was freed from him through diplomatic tactics. ॥4॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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