Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.129.39: जब ब्राह्मण ने यह कहा और राक्षस का आदर किया, तो राक्षस ने भी ब्राह्मण का बहुत आदर किया। उसने ब्राह्मण को अपना मित्र बनाया और उसे धन देकर विदा किया। | mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं सम्पूजितं रक्षो विप्रं तं प्रत्यपूजयत्।
सखायमकरोच्चैनं संयोज्यार्थैर्मुमोच ह॥ ३९॥
अनुवाद
जब ब्राह्मण ने यह कहा और राक्षस का आदर किया, तो राक्षस ने भी ब्राह्मण का बहुत आदर किया। उसने ब्राह्मण को अपना मित्र बनाया और उसे धन देकर विदा किया।
When the Brahmin said this and respected the demon, the demon also respected the Brahmin very much. He made the Brahmin his friend and gave him money and left him.
इति श्रीमहाभारते अनुशासनपर्वणि दानधर्मपर्वणि हरिणकृशकाख्याने चतुर्विंशत्यधिक शततमोऽध्याय:॥ १२४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत अनुशासनपर्वके अन्तर्गत दानधर्मपर्वमें दुर्बल और पाण्डुवर्णके राक्षसका आख्यानविषयक एक सौ चौबीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १२४॥
(दाक्षिणात्य अधिक पाठके २८ १/२ श्लोक मिलाकर कुल ६७ १/२ श्लोक हैं)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥