श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  13.129.38 
श्रोत्रियांश्च विकर्मस्थान् प्राज्ञांश्चाप्यजितेन्द्रियान्।
मन्येऽनुध्यायसि जनांस्तेनासि हरिण: कृश:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वेदों को जानने वाले ब्राह्मणों को वेदविरुद्ध कर्म करने में तत्पर और विद्वानों को इन्द्रियों के अधीन देखकर मैं समझता हूँ कि तुम निरन्तर चिन्तित रहते हो। सम्भवतः इसी कारण तुम्हारा शरीर श्वेत (पीला) हो गया है और तुम दुर्बल हो गए हो। 38॥
 
Seeing the Brahmins having knowledge of the Vedas ready to do things contrary to the Vedas and the scholars being dependent on the senses, I understand that you are constantly worried. Probably that is why your body has turned white (yellow) and you have become weak. 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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