श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  13.129.36 
पापान् प्रवर्धतो दृष्ट्वा कल्याणानावसीदत:।
ध्रुवं गर्हयसे नित्यं तेनासि हरिण: कृश:॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
पापियों को उन्नति करते और कल्याण कार्यों में लगे हुए पुण्यात्माओं को दुःख भोगते देखकर आप निश्चय ही इस स्थिति की सदैव निन्दा करते हैं; इसीलिए आप दुर्बल और पाण्डुवर्ण के हो गए हैं ॥36॥
 
Seeing sinners progressing and virtuous people engaged in welfare activities suffering, you certainly always condemn this situation; That is why you have become weak and of Panduvarna. 36॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd