Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.129.34: तुम्हारे वचन धर्म, अर्थ और काम के अनुकूल और समयानुकूल हैं, फिर भी दूसरे लोग उन पर ठीक से विश्वास नहीं करते। इसी कारण तुम मंद और क्षीण होते जा रहे हो ॥ 34॥ | mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
धर्म्यमर्थ्यं च काम्यं च काले चाभिहितं वच:।
न प्रतीयन्ति ते नूनं तेनासि हरिण: कृश:॥ ३४॥
अनुवाद
तुम्हारे वचन धर्म, अर्थ और काम के अनुकूल और समयानुकूल हैं, फिर भी दूसरे लोग उन पर ठीक से विश्वास नहीं करते। इसी कारण तुम मंद और क्षीण होते जा रहे हो ॥ 34॥
Your words are in accordance with Dharma, Artha and Kama and are timely, but still others do not believe them properly. That is why you are becoming dull and thin. ॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥