श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  13.129.33 
सुहृदां दु:खमार्तानां न प्रमोक्ष्यसि चार्तिजम्।
अलमर्थगुणैर्हीनं तेनासि हरिण: कृश:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे प्रिय मित्र और सम्बन्धी रोग आदि से बहुत दुःखी हैं और तुम उन्हें उस दुःख से मुक्त नहीं कर पाते और स्वयं भी अपने को भौतिक लाभ से वंचित पाते हो; कदाचित् इसीलिए तुम गोरे और दुबले हो गए हो॥ 33॥
 
Your dear friends and relatives suffer a lot due to diseases etc. and you are unable to free them from the pain caused by that suffering. And you yourself also find yourself deprived of material gains; perhaps that is why you have become white and skinny.॥ 33॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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