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mahabharat 13.129.31: एक बात जो ध्यान में आती है, वह यह है कि तुम्हें अपना कोई दोष दिखाई नहीं देता, फिर भी दूसरे लोग तुम्हें अकारण कोसते रहते हैं। शायद इसीलिए तुम मंद और दुर्बल होते जा रहे हो ॥31॥   |   mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  13.129.31 
नूनमात्मकृतं दोषमपश्यन् किंचिदात्मन:।
अकारणेऽभिशप्तोऽसि तेनासि हरिण: कृश:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
एक बात जो ध्यान में आती है, वह यह है कि तुम्हें अपना कोई दोष दिखाई नहीं देता, फिर भी दूसरे लोग तुम्हें अकारण कोसते रहते हैं। शायद इसीलिए तुम मंद और दुर्बल होते जा रहे हो ॥31॥
 
One thing that comes to mind is that you do not see any fault of yours, yet others keep cursing you without any reason. Perhaps that is why you are becoming dull and weak. ॥ 31॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)