श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  13.129.3 
गुणांस्तु शृणु मे राजन् सान्त्वस्य भरतर्षभ।
दारुणान्यपि भूतानि सान्त्वेनाराधयेद् यथा॥ ३॥
 
 
अनुवाद
राजन! भरतश्रेष्ठ! अब अपने सामने जो गुण हैं, उन्हें सुनिए। साम के बल से मनुष्य भयंकर से भयंकर प्राणियों को भी वश में कर सकता है। 3॥
 
Rajan! Bharatshrestha! Now listen to the qualities in front of you. With the help of Sama, man can control even the most terrible creatures. 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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