श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  13.129.29 
अविद्वान् भीरुरल्पार्थे विद्याविक्रमदानजम्।
यश: प्रार्थयसे नूनं तेनासि हरिण: कृश:॥ २९॥
 
 
अनुवाद
या हो सकता है कि आप विद्वान न होते हुए भी विद्या से मिलने वाली प्रसिद्धि पाना चाहते हों। आप डरपोक और कायर होते हुए भी अपनी वीरता के कारण प्रसिद्धि पाना चाहते हों और आपके पास बहुत कम धन होने पर भी आप दानशील होने के कारण प्रसिद्धि पाने के लिए लालायित हों। इसीलिए आप दुबले-पतले और पीले होते जा रहे हैं।
 
Or it may be that even though you are not a scholar, you still want to gain the fame that comes with learning. Even though you are timid and cowardly, you desire to gain fame due to your valour and even though you have very little wealth, you are eager to gain fame for being a generous person. That is why you are becoming thin and pale. 29.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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