श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  13.129.26 
नूनं त्वां सुगुणैर्युक्तं पूजयानं सुहृद्‍ध्रुवम्।
ममार्थ इति जानीते तेनासि हरिण: कृश:॥ २६॥
 
 
अनुवाद
तुम सद्गुणों से युक्त हो, इसलिए अन्य लोग तुम्हारा आदर करते हैं; परन्तु तुम्हारा मित्र यह समझता है कि मेरे प्रभाव से ही उसे आदर मिल रहा है। इसीलिए तुम चिंता के कारण दुर्बल और पीले हो रहे हो।
 
Of course you are respected by others because you are endowed with good qualities; but your friend thinks that he is getting respect only due to my influence. That is why you are becoming weak and pale due to worry. 26.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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