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mahabharat 13.129.24: हो सकता है कि तुम्हारी मूर्खता के कारण तुम्हारे कुछ प्रिय और दृढ़ निश्चयी लोग तुमसे रुष्ट हो गए हों और तुम उन्हें किसी भी प्रकार से शांत न कर सको। इसी कारण तुम दुर्बल और पीले होते जा रहे हो॥ 24॥   |   mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  13.129.24 
दृढपूर्वं श्रुतं मूर्खं कुपितं हृदयप्रियम्।
अनुनेतुं न शक्नोषि तेनासि हरिण: कृश:॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हो सकता है कि तुम्हारी मूर्खता के कारण तुम्हारे कुछ प्रिय और दृढ़ निश्चयी लोग तुमसे रुष्ट हो गए हों और तुम उन्हें किसी भी प्रकार से शांत न कर सको। इसी कारण तुम दुर्बल और पीले होते जा रहे हो॥ 24॥
 
Some of your dear and determined people might have become angry with you due to your foolishness and you might not be able to pacify him by any means. That is why you are becoming weak and pale.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)