Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 13.129.21: मैं यह भी जानता हूँ कि तुम्हारा मन तपस्या में लगा हुआ है और इसीलिए तुम वन में रहना चाहते हो, परंतु तुम्हारे भाई-बन्धु इसे स्वीकार नहीं करते; इसलिए तुम श्वेत और दुर्बल हो गए हो ॥ 21॥ | mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना । mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मैं यह भी जानता हूँ कि तुम्हारा मन तपस्या में लगा हुआ है और इसीलिए तुम वन में रहना चाहते हो, परंतु तुम्हारे भाई-बन्धु इसे स्वीकार नहीं करते; इसलिए तुम श्वेत और दुर्बल हो गए हो ॥ 21॥
I also understand that your mind is inclined towards tapasya and therefore you wish to live in the forest, but your brothers and relatives do not approve of this; therefore you have become white and weak. ॥ 21॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥