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mahabharat 13.129.19: यद्यपि तू हठीले और दुष्ट पुरुषों के बीच में बिना किसी संकोच के अच्छी बातें बोलता है, फिर भी वहाँ तेरे गुण प्रकट नहीं होते; इसीलिए तू दुर्बल होकर नष्ट हो रहा है ॥19॥   |   mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.129.19 
असत्स्वपि निविष्टेषु ब्रुवतो मुक्तसंशयम्।
गुणास्ते न विराजन्ते तेनासि हरिण: कृश:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि तू हठीले और दुष्ट पुरुषों के बीच में बिना किसी संकोच के अच्छी बातें बोलता है, फिर भी वहाँ तेरे गुण प्रकट नहीं होते; इसीलिए तू दुर्बल होकर नष्ट हो रहा है ॥19॥
 
Even though you speak good things without any hesitation in the midst of obstinate and wicked men, your virtues are not revealed there; that is why you are becoming weak and fade away. ॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)