श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  13.129.18 
प्रकाशार्थगतिर्नूनं रहस्यकुशल: कृती।
तज्ज्ञैर्न पूज्यसे नूनं तेनासि हरिण: कृश:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तुम्हारे धन कमाने का ढंग तो सब जानते हैं। तुम रहस्यमयी बातें समझाने में कुशल और विद्वान हो, फिर भी विद्वान लोग तुम्हारा आदर नहीं करते; इसीलिए तुम श्वेत और दुर्बल होते जा रहे हो॥18॥
 
Your method of earning wealth is known to everyone. You are skilled and learned in explaining mysterious things, yet the wise men do not respect you; that is why you are becoming white and weak. ॥18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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