श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  13.129.16 
प्रज्ञासम्भावितो नूनमप्रज्ञैरुपसंहित:।
हीयमानोऽसि दुर्वृत्तैस्तेनासि हरिण: कृश:॥ १६॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि तुम अपनी महान बुद्धि के कारण सम्मान के योग्य हो, फिर भी अज्ञानी लोग तुम्हारी हँसी उड़ाते हैं और दुष्ट लोग तुम्हारा तिरस्कार करते हैं। इसी चिन्ता के कारण तुम्हारा शरीर पीला और मुरझाया हुआ हो रहा है ॥16॥
 
Although you are worthy of respect because of your great intellect, ignorant people laugh at you and wicked people despise you. Due to this worry your body is becoming pale and withered. ॥16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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