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mahabharat 13.129.13: तुम्हें अवश्य ही दुःख हो रहा होगा, क्योंकि तुम्हारे पास जीविका का कोई साधन नहीं है, किन्तु अभिमान के कारण तुम जीविका के साधनों की निन्दा करते हो, उन्हें स्वीकार नहीं करते। यही तुम्हारे दुःख और दुर्बलता का कारण है॥13॥   |   mahabharat अध्याय 13.129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना   ।   mahabharat पर्व 13: अनुशासन पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  13.129.13 
अवृत्त्या क्लिश्यमानोऽपि वृत्त्युपायान् विगर्हयन्।
माहात्म्याद् व्यथसे नूनं तेनासि हरिण: कृश:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तुम्हें अवश्य ही दुःख हो रहा होगा, क्योंकि तुम्हारे पास जीविका का कोई साधन नहीं है, किन्तु अभिमान के कारण तुम जीविका के साधनों की निन्दा करते हो, उन्हें स्वीकार नहीं करते। यही तुम्हारे दुःख और दुर्बलता का कारण है॥13॥
 
You must be suffering because you have no means of livelihood, but due to your pride you will criticise the means of earning a livelihood and will not accept them. This is the reason for your sadness and weakness.॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)