श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.129.12 
गुणवान् विगुणानन्यान् नूनं पश्यसि सत्कृतान्।
प्राज्ञोऽप्राज्ञान् विनीतात्मा तेनासि हरिण: कृश:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
तू गुणवान, विद्वान् और विनम्र होकर भी आदर नहीं पाता तथा गुणहीन और मूर्ख लोगों को आदर पाते देखता है; इसी कारण तेरे शरीर का रंग फीका पड़ गया है और तू दुर्बल हो गया है ॥12॥
 
Even though you are virtuous, learned and polite, you do not get respect and you see meritless and foolish people being honoured; That is why the complexion of your body has become dull and you have become weak. 12॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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