श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  13.129.11 
धनैश्वर्याधिका: स्तब्धास्त्वद्‍गुणै: परमावरा:।
अवजानन्ति नूनं त्वां तेनासि हरिण: कृश:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
वे जड़ पुरुष जो गुणों में तुमसे हीन हैं, वे अधिक धन और ऐश्वर्य के कारण सदैव तुम्हारी उपेक्षा करते रहते हैं; इसी कारण तुम दुर्बल और श्वेत (पीले) होते जा रहे हो॥11॥
 
Those inert men who are inferior in qualities to you, because of their greater wealth and prosperity, always ignore you; that is why you are becoming weak and white (yellow). ॥ 11॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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