श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 129: नारदका पुण्डरीकको भगवान‍् नारायणकी आराधनाका उपदेश तथा उन्हें भगवद्धामकी प्राप्ति, सामगुणकी प्रशंसा, ब्राह्मणका राक्षसके सफेद और दुर्बल होनेका कारण बताना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  13.129.1 
युधिष्ठिर उवाच
साम्नि चापि प्रदाने च ज्याय: किं भवतो मतम्।
प्रब्रूहि भरतश्रेष्ठ यदत्र व्यतिरिच्यते॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा, "भरतश्रेष्ठ! आपके विचार से साम और दान में से कौन श्रेष्ठ है? मुझे बताइए कि इनमें से कौन श्रेष्ठ है।" ॥1॥
 
Yudhishthira asked, "Best of the Bharatas! In your opinion, which is the best among Sama and Daan? Tell me which is the best among them." ॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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