श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 128: शाण्डिली और सुमनाका संवाद—पतिव्रता स्त्रियोंके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  13.128.8 
नाहं काषायवसना नापि वल्कलधारिणी।
न च मुण्डा च जटिला भूत्वा देवत्वमागता॥ ८॥
 
 
अनुवाद
‘देवी! मैंने भगवा वस्त्र नहीं पहने, छाल के वस्त्र नहीं पहने, सिर नहीं मुंडा और लंबी जटाएँ नहीं रखीं। ये सब करके मैं देवलोक में नहीं आया हूँ॥8॥
 
‘Devi! I did not wear saffron clothes, did not wear bark clothes, did not shave my head and did not keep long matted locks. I have not come to Devlok by doing all these.॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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