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श्लोक 13.128.7  |
इति पृष्टा सुमनया मधुरं चारुहासिनी।
शाण्डिली निभृतं वाक्यं सुमनामिदमब्रवीत्॥ ७॥ |
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| अनुवाद |
| सुमना के इस मधुर वाणी में पूछने पर शाण्डिली ने मनोहर मुस्कान के साथ उसे विनम्र शब्दों में इस प्रकार उत्तर दिया -॥7॥ |
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| When Sumana asked in this sweet voice, Shandili with a charming smile replied to him in polite words as follows -॥ 7॥ |
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