श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 128: शाण्डिली और सुमनाका संवाद—पतिव्रता स्त्रियोंके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  13.128.4 
हुताशनशिखेव त्वं ज्वलमाना स्वतेजसा।
सुता ताराधिपस्येव प्रभया दिवमागता॥ ४॥
 
 
अनुवाद
‘तुम अग्नि की ज्वाला के समान अपने तेज से जल रही हो और चन्द्रमा की पुत्री के समान अपने तेज से प्रकाशित होकर स्वर्ग में आई हो। 4॥
 
‘You are burning with your brilliance like the flame of fire and like the daughter of the moon, you have come to heaven illuminated with your bright light. 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)