श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 128: शाण्डिली और सुमनाका संवाद—पतिव्रता स्त्रियोंके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  13.128.19 
नायासयामि भर्तारं कुटुम्बार्थेऽपि सर्वदा।
गुप्तगुह्या सदा चास्मि सुसम्मृष्टनिवेशना॥ १९॥
 
 
अनुवाद
‘मैंने कभी भी उन्हें कुटुम्ब के पालन-पोषण के काम के लिए भी परेशान नहीं किया। मैंने सदैव घर का भेद छिपाकर रखा और घर-आँगन को झाड़-बुहारकर स्वच्छ रखा।॥19॥
 
‘I never bothered them even for the work of looking after the family. I always kept the secrets of the house hidden and kept the house and courtyard clean by sweeping them.॥ 19॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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