vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री महाभारत
»
पर्व 13: अनुशासन पर्व
»
अध्याय 128: शाण्डिली और सुमनाका संवाद—पतिव्रता स्त्रियोंके कर्तव्यका वर्णन
»
श्लोक 16
श्लोक
13.128.16
प्रवासं यदि मे याति भर्ता कार्येण केनचित्।
मंगलैर्बहुभिर्युक्ता भवामि नियता तदा॥ १६॥
अनुवाद
यदि मेरे पति कभी किसी महत्वपूर्ण कार्य से विदेश जाते तो मैं नियमित रूप से वहीं रहती और उनके कल्याण के लिए विभिन्न शुभ कार्य करती।
If my husband ever went abroad for some important work, I would stay there regularly and perform various auspicious tasks for his welfare.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×