श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 128: शाण्डिली और सुमनाका संवाद—पतिव्रता स्त्रियोंके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  13.128.15 
कुटुम्बार्थे समानीतं यत्किंचित् कार्यमेव तु।
प्रातरुत्थाय तत्सर्वं कारयामि करोमि च॥ १५॥
 
 
अनुवाद
‘पूरे परिवार के लिए जो भी काम करना होता था, मैं उसे सुबह-सुबह ही निपटा लेता था।॥15॥
 
‘Whatever work was to be done for the whole family, I used to get it done early in the morning.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)