श्री महाभारत  »  पर्व 13: अनुशासन पर्व  »  अध्याय 128: शाण्डिली और सुमनाका संवाद—पतिव्रता स्त्रियोंके कर्तव्यका वर्णन  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  13.128.12 
असद् वा हसितं किंचिदहितं वापि कर्मणा।
रहस्यमरहस्यं वा न प्रवर्तामि सर्वथा॥ १२॥
 
 
अनुवाद
मैंने कभी किसी के साथ अकेले में या सार्वजनिक रूप से अश्लील परिहास नहीं किया और न ही मेरे किसी कृत्य से किसी को कोई हानि हुई। मैं कभी ऐसे कार्यों में लिप्त नहीं हुआ।॥12॥
 
‘I never made obscene jokes with anyone either in private or in public and no one was harmed by any of my actions. I never indulged in such activities.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)