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श्री महाभारत
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पर्व 13: अनुशासन पर्व
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अध्याय 128: शाण्डिली और सुमनाका संवाद—पतिव्रता स्त्रियोंके कर्तव्यका वर्णन
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श्लोक 10
श्लोक
13.128.10
देवतानां पितॄणां च ब्राह्मणानां च पूजने।
अप्रमत्ता सदा युक्ता श्वश्रूश्वशुरवर्तिनी॥ १०॥
अनुवाद
‘मैं सदैव अपने सास-ससुर की आज्ञा का पालन करती थी और देवताओं, पितरों और ब्राह्मणों के पूजन में तत्पर रहती थी।॥10॥
‘I always obeyed my mother-in-law and father-in-law and remained carefully engaged in the worship of gods, ancestors and Brahmins.॥ 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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