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श्लोक 13.127.19  |
स्वस्ति प्राप्नुहि मैत्रेय गृहान् साधु व्रजाम्यहम्।
एतन्मनसि कर्तव्यं श्रेय एवं भविष्यति॥ १९॥ |
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| अनुवाद |
| मैत्रेय! तुम्हारा कल्याण हो। अब मैं सावधानी से अपने आश्रम को जा रहा हूँ। मैंने जो कुछ कहा है, उसे स्मरण रखना; वह तुम्हारे लिए कल्याणकारी होगा।॥19॥ |
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| ‘Maitreya! May you be blessed. Now I am going to my hermitage with caution. Remember what I have told you; it will be good for you.’॥19॥ |
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